उस ने भूले से क्या नज़र डाली
उम्र सारी ख़राब कर डाली
- अज्ञात
मैं उम्र को तो मुझे उम्र खींचती है उलट
तज़ाद सम्त का है अस्प और सवार के बीच
- एजाज़ गुल
आदमियत के सिवा जिस का कोई मक़्सद न हो
उम्र भर उस आदमी की जुस्तुजू करते रहो
- अनवर साबरी
हमेशा मैं ने गरेबां को चाक चाक किया
तमाम उम्र रफ़ूगर रहे रफ़ू करते
- हैदर अली आतिश
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