आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

'उम्र' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

Umra shayari collection
                
                                                         
                            

उस ने भूले से क्या नज़र डाली
उम्र सारी ख़राब कर डाली
- अज्ञात


मैं उम्र को तो मुझे उम्र खींचती है उलट
तज़ाद सम्त का है अस्प और सवार के बीच
- एजाज़ गुल

आदमियत के सिवा जिस का कोई मक़्सद न हो
उम्र भर उस आदमी की जुस्तुजू करते रहो
- अनवर साबरी


हमेशा मैं ने गरेबां को चाक चाक किया
तमाम उम्र रफ़ूगर रहे रफ़ू करते
- हैदर अली आतिश

आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर