चले चलिए कि चलना ही दलील-ए-कामरानी है
जो थक कर बैठ जाते हैं वो मंज़िल पा नहीं सकते
~हफ़ीज़ बनारसी
शायद मुझे निकाल कर पछता रहे हैं आप
महफ़िल में इस ख़्याल से फिर आ गया हूं मैं
~अदम
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