नवाज देवबंदी का जन्म 16 जुलाई 1956 को यूपी के देवबंद सहारनपुर में हुआ था। इनका मूल नाम मुहम्मद नवाज खान है। पहली बारिश और पहला आसमान इनके प्रमुख गजल संग्रह है। इनकी मोहब्बत सीधे और सरल शब्दों की नजाकत है। यह आपको इन गजलों से स्पष्ट हो जाएगा।
लेके माज़ी को जो हाल आया तो दिल काँप गया
जब कभी उनका ख़याल आया तो दिल काँप गया
ऐसा तोड़ा था मुहब्बत में किसी ने दिल को
जब किसी शीशे में बाल आया तो दिल काँप गया
सर बलंदी पे तो मग़रूर थे हम भी लेकिन
चढ़ते सूरज पे ज़वाल आया तो दिल काँप गया
बदनज़र उठने ही वाली थी किसी की जानिब
अपने बेटी का ख़याल आया तो दिल काँप गया
ख़ुद को कितना छोटा करना पड़ता है
ख़ुद को कितना छोटा करना पड़ता है
बेटे से समझौता करना पड़ता है
जब औलादें नालायक हो जाती हैं
अपने ऊपर ग़ुस्सा करना पड़ता है
सच्चाई को अपनाना आसान नहीं
दुनिया भर से झगड़ा करना पड़ता है
जब सारे के सारे ही बेपर्दा हों
ऐसे में खु़द पर्दा करना पड़ता है
प्यासों की बस्ती में शोले भड़का कर
फिर पानी को महंगा करना पड़ता है
हँस कर अपने चहरे की हर सिलवट पर
शीशे को शर्मिंदा करना पड़ता है
वहाँ कैसे कोई दिया जले, जहाँ दूर तक हवा न हो
उन्हें हाले-दिल न सुनाइये, जिन्हें दर्दे-दिल का पता न हो
हों अजब तरह की शिकायतें, हों अजब तरह की इनायतें
तुझे मुझसे शिकवे हज़ार हों, मुझे तुझसे कोई गिला न हो
कोई ऐसा शेर भी दे ख़ुदा, जो तेरी अता हो, तेरी अता
कभी जैसा मैंने कहा न हो, कभी जैसा मैंने सुना न हो
न दिये का है, न हवा का है, यहाँ जो भी कुछ है ख़ुदा का है
यहाँ ऐसा कोई दिया नहीं, जो जला हो और वो बुझा न हो
मैं मरीज़े-इश्क़ हूँ चारागर, तू है दर्दे-इश्क़ से बेख़बर
ये तड़प ही इसका इलाज है, ये तड़प न हो तो शिफ़ा न हो
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8 वर्ष पहले
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