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भोजपुरी विशेष, गीत और धुन जो झूमने पर मजबूर कर दे-झूला झूलत रहीं बुनिया फुहार में

Bhojpuri Kavya
                
                                                         
                            विश्वनाथ प्रसाद 'शैदा' भोजपुरी के बेहद चर्चित गीतकार कवि रहे हैं। आपकी रचना मधुर एवं सरस होती है। आप भोजपुरी मुहावरों का प्रयोग काव्य रचनाओं में करने के लिए जाने जाते हैं- 
                                                                 
                            

रहलीं करत दूध के कुल्ला, छिल के खात रहीं रसगुल्ला सखि  हम तऽ खुल्लम-खुल्ला, 
झूला झूलत रहीं बुनिया फुहार में, सावन के बहार में ना...

हमारी जिंदगी में केवल सुख ही सुख थे, मन आनंद से सराबोर था, सावन की बारिश में मैं झूला-झूल रही थी...

मोरा अँखिया के कोर

हम तऽ रहलीं टह-टह गोर, करत रहलीं हम अँजोर
मोरा अँखिया के कोर, 
धार कहाँ अइसन तेज बा कटार में
चाहें तलवार में ना... 

मैं गौर वर्ण की मल्लिका थी, दिव्य कांति की वजह से चारो तरफ प्रकाश हो जाता था। मेरी नैन कटारी इतनी तेज थी कि वैसी धार तलवार और कटार में भी नहीं होगी।
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मोरा अँखिया के कोर

8 वर्ष पहले

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