ख़ूब आराइशें भी हैं लेकिन
सादगी सादगी है क्या कहिए
- ताज अहमद ताज
अजब ख़ुलूस अजब सादगी से करता है
दरख़्त नेकी बड़ी ख़ामुशी से करता है
- अतुल अजनबी
वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
- हसरत मोहानी
बनावट हो तो ऐसी हो कि जिस से सादगी टपके
ज़ियादा हो तो असली हुस्न छुप जाता है ज़ेवर से
- सफ़ी लखनवी
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