कहते हैं कि मुहब्बत में अक्सर लोग शायर बन जाते हैं तो शायरों को तो मुहब्बत होगी ही। पेश हैं कुछ चुनिंदा शेर जो मुहब्बत में डूबे शायरों ने कहे
दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
- नासिर काज़मी
आख़री हिचकी तिरे ज़ानूँ पे आए
मौत भी मैं शाइराना चाहता हूँ
- क़तील शिफ़ाई
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा
- बशीर बद्र
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे
- जौन एलिया
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X