कहते हैं कि मुहब्बत में अक्सर लोग शायर बन जाते हैं तो शायरों को तो मुहब्बत होगी ही। पेश हैं कुछ चुनिंदा शेर जो मुहब्बत में डूबे शायरों ने कहे
दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
- नासिर काज़मी
आख़री हिचकी तिरे ज़ानूँ पे आए
मौत भी मैं शाइराना चाहता हूँ
- क़तील शिफ़ाई
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