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'रक्षाबंधन' और ये 10 फिल्मी गीतों के शेर और मुखड़े...

Raksha Bandhan
                
                                                         
                            रक्षाबंधन अपने आप में एक अनूठा त्यौहार है। राखी अगर भावनाओं का उत्सव है तो संकल्प का दिन भी है। भाई-बहन के रिश्ते और रक्षा बंधन के भावनाओं को सिनेमा अपने ढंग से प्रस्तुत करता है। पेश है हिंदी फिल्मों में 'राखी' के गीतों के शेर और मुखड़े- 
                                                                 
                            

तेरी साँसों की कसम खाके, हवा चलती है
तेरे चहरे की झलक पा के, बहार आती है
-साहिर लुधियानवी
फिल्म-काजल (1965)


बंधा हुआ एक-एक धागे में भाई-बहन का प्यार
राखी धागों का त्यौहार, राखी धागों का त्यौहार
- राजेंद्र कृष्ण
फिल्म-राखी (1962)

भाई-बहन का नाता

कितना कोमल कितना सुन्दर, भाई-बहन का नाता
इस नाते को याद दिलाने, ये त्यौहार है आता
- राजेंद्र कृष्ण
फिल्म-राखी (1962)


हम बहनों के लिए मेरे भैया, आता है एक दिन साल में
आज के दिन मैं जहाँ भी रहूँ, चले आना वहाँ हर हाल में
- आनंद बक्षी
फिल्म-अंजाना (1969)
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भाई-बहन का नाता

8 वर्ष पहले

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