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'रक्षाबंधन'  पर चुनिंदा शायरों के 10 बेहतरीन शेर...

Raksha Bandhan
                
                                                         
                            रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक 'रक्षा बंधन' असल में मानवीय भावों का बंधन है। यह एक ऐसा उत्सव है जिस पर कवियों और शायरों ने भी अपने एहसास बड़ी संजीदगी से व्यक्त किए। पेश है 'रक्षाबंधन' शायरों के चुनिंदा अल्फाज़- 
                                                                 
                            

चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी 
सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी 
-नज़ीर अकबराबादी

किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा
अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा
- मुनव्वर राना

राखियाँ ले के सिलोनों की बरहमन निकलें

राखियाँ ले के सिलोनों की बरहमन निकलें
तार बारिश का तो टूटे कोई साअत कोई पल
- अज्ञात

अदा से हाथ उठते हैं गुल-ए-राखी जो हिलते हैं 
कलेजे देखने वालों के क्या क्या आह छिलते हैं 
-नज़ीर अकबराबादी
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राखियाँ ले के सिलोनों की बरहमन निकलें

8 वर्ष पहले

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