27 जुलाई यानी आज चंद्र ग्रहण है। यह सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण है। चंद्र ग्रहण के दौरान ऐसा लगता है चांद को बादल अपनी आगोश में ले लेता है। पर वास्तव में ऐसा नहीं है। दरअसल सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की कक्षीय स्थिति की वजह से ग्रहण होता है। आज के चंद्र ग्रहण में चांद पूरा लाल हो जाएगा। इसे ब्लड मून कहा जा रहा है। ग्रहण पर हम कुछ चुनिंदा शेर-शायरी का यहां उल्लेख कर रहे हैं।
हम-सफ़र हो तो कोई अपना-सा
चाँद के साथ चलोगे कब तक
-शोहरत बुख़ारी
रात को रोज़ डूब जाता है
चाँद को तैरना सिखाना है
-बेदिल हैदरी
चाँद को रेशमी बादल से उलझता देखूँ
वो हवा है कभी आँचल कभी चेहरा देखूँ
-बिमल कृष्ण अश्क
इतने घने बादल के पीछे
कितना तन्हा होगा चाँद
-परवीन शाकिर
नील-गगन में तैर रहा है उजला उजला पूरा चाँद
माँ की लोरी सा बच्चे के दूध कटोरे जैसा चाँद
-निदा फाजली
चाँद बादल में अच्छा लगता है
आधे रूख पे नक़ाब रहने दो
-मोहसिन नकवी
चाँद को छूके चले आए हैं विज्ञान के पंख
देखना ये है कि इन्सान कहाँ तक पहुँचे
-गोपाल दास नीरज
मुझ को मालूम है महबूब-परस्ती का अज़ाब
देर से चाँद निकलना भी ग़लत लगता है
-अहमद कमाल परवाज़ी
तुम जिसे चाँद कहते हो वो अस्ल में
आसमाँ के बदन पर कोई घाव है
-त्रिपुरारि
पूछना चाँद का पता 'आज़र'
जब अकेले में रात मिल जाए
-बलवान सिंह आज़र
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डूबना...
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