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मोहम्मद रफ़ी के फिल्मी नग़मों से चुनिंदा शेर...

मोहम्मद रफ़ी के फिल्मी नग़मों से चुनिंदा शेर...
                
                                                         
                            एक फ़कीर एक गांव में अक्सर जाया करता था और एक बच्चा उनके पीछे-पीछे घूमा करता था, एक दिन उस फ़कीर ने बच्चे को गोंद में उठा लिया और कहा कि- "  जा बच्चा तू एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनेगा। दुनिया तेरे नाम की दीवानी होगी।''  वही बच्चा आगे चलकर स्वर सम्राट मोहम्मद रफी के नाम से पहचाना गया। कहते हैं रफी साहब को एक फ़कीर की दुआ थी। पेश है रफी साहब के गाये फिल्मी नगमों के चुने हुए शेर- 
                                                                 
                            

तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम 
ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम 
- साहिर लुधियानवी
- फिल्म- प्यासा (1957)


कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गयी
लब थराथरा रहे थे मगर बात हो गयी
- शकील बदायुनी
फिल्म-पालकी (1967)


इक दिल के टुकड़े हज़ार हुए, कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा 
बहते हुए आँसू रुक न सके, कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा 
- क़मर जलालाबादी
फिल्म- प्यार की जीत (1948)

गुज़रे हैं आज इश्क़ में हम उस मक़ाम से
नफ़रत सी हो गई है मुहब्बत के नाम से
- शकील बदायुनी 
फिल्म- दिल दिया दर्द लिया  (1966)


दिल सुलगने लगा अश्क़ बहने लगे
जाने क्या-क्या हमें लोग कहने लगे
-फारुख़ कैसर
फिल्म- पारसमणि (1963)


आप ने सीखा है क्या दिल के लगाने के सिवा
आप को आता है क्या नाज़ दिखाने के सिवा
- राजा मेंहदी अली खान
फिल्म- नीला आकाश (1965)
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6 वर्ष पहले

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