आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जीवन दर्शन के चुनिंदा शेर...

जीवन दर्शन के चुनिंदा शेर...
                
                                                         
                            रूप की धूप कहाँ जाती है मालूम नहीं 
                                                                 
                            
शाम किस तरह उतर आती है रुख़्सारों पर 
- इरफ़ान सिद्दीक़ी

अपने होने का कुछ एहसास न होने से हुआ 
ख़ुद से मिलना मिरा इक शख़्स के खोने से हुआ 
- मुसव्विर सब्ज़वारी

ऐसी तारीकियाँ आँखों में बसी हैं कि 'फ़राज़' 
रात तो रात है हम दिन को जलाते हैं चराग़ 
- अहमद फ़राज़ आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर