सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का 28 सितंबर को जन्मदिन है। उनका जन्म इंदौर में 1929 में हुआ था। हजारों गीतों को सुरमयी आवाज देकर अमर करने वाली लता ने महान शायर मिर्जा़ गा़लिब को भी अपनी आवाज दी है। 1969 में रिलीज हृदयनाथ मंगेशकर के एलबम में उन्होंने गा़लिब की यह गज़ल गाई।
नक़्श फ़रियादी है किस की शोख़ी-ए-तहरीर का
काग़ज़ी है पैरहन हर पैकर-ए-तस्वीर का
काव काव-ए-सख़्त-जानी हाए-तन्हाई न पूछ
सुब्ह करना शाम का लाना है जू-ए-शीर का
सीना-ए-शमशीर से बाहर है दम शमशीर का...
जज़्बा-ए-बे-इख़्तियार-ए-शौक़ देखा चाहिए
सीना-ए-शमशीर से बाहर है दम शमशीर का
आगही दाम-ए-शुनीदन जिस क़दर चाहे बिछाए
मुद्दआ अन्क़ा है अपने आलम-ए-तक़रीर का
मू-ए-आतिश दीदा है हल्क़ा मिरी ज़ंजीर का...
बस-कि हूँ 'ग़ालिब' असीरी में भी आतिश ज़ेर-ए-पा
मू-ए-आतिश दीदा है हल्क़ा मिरी ज़ंजीर का
आतिशीं-पा हूँ गुदाज़-ए-वहशत-ए-ज़िन्दाँ न पूछ
मू-ए-आतिश दीदा है हर हल्क़ा याँ ज़ंजीर का
शोख़ी-ए-नैरंग सैद-ए-वहशत-ए-ताऊस है
दाम-ए-सब्ज़ा में है परवाज़-ए-चमन तस्ख़ीर का
न'अल आतिश में है तेग़-ए-यार से नख़चीर का...
लज़्ज़त-ए-ईजाद-ए-नाज़ अफ़सून-ए-अर्ज़-ज़ौक़-ए-क़त्ल
न'अल आतिश में है तेग़-ए-यार से नख़चीर का
ख़िश्त पुश्त-ए-दस्त-ए-इज्ज़ ओ क़ालिब आग़ोश-ए-विदा'अ
पुर हुआ है सैल से पैमाना किस ता'मीर का
वहशत-ए-ख़्वाब-ए-अदम शोर-ए-तमाशा है 'असद'
जो मज़ा जौहर नहीं आईना-ए-ताबीर का
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