जुस्तजू का मतलब होता है- आकांक्षा, इच्छा, तलाश। इच्छाएं और कल्पनाएं शायरों के लिए हमेशा से मौजू विषय रहे हैं। पेश है 'जुस्तजू' पर शायरों के अशआर...
हम कि मायूस नहीं हैं उन्हें पा ही लेंगे
लोग कहते हैं कि ढूँडे से ख़ुदा मिलता है
- अर्श सिद्दीक़ी
सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता
- निदा फ़ाज़ली
तिरी आरज़ू तिरी जुस्तुजू में भटक रहा था गली गली
मिरी दास्ताँ तिरी ज़ुल्फ़ है जो बिखर बिखर के सँवर गई
- बशीर बद्र
जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हम ने
- शहरयार
पा सकेंगे न उम्र भर जिस को
जुस्तुजू आज भी उसी की है
- हबीब जालिब
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