उर्दू अदब के मक़बूल नामों में से एक हैं हजरत जौन एलिया, जिन्होंने शायरी की लीक को एक नया मोड़ दिया इसलिए वे सीधे दिल में उतरे और उनके शेर महबूबों के राग बन गए। पेश हैं जौन एलिया के लिखे बेहतरीन शेर
अपने सब यार काम कर रहे हैं
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं
अब तो हर बात याद रहती है
ग़ालिबन मैं किसी को भूल गया
अब मेरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या
इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैंने
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अब मेरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
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