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'इंसानियत' पर ये हैं 10 चुनिंदा शेर...

'इंसानियत' पर ये हैं 10 चुनिंदा शेर
                
                                                         
                            उम्मीद वो जज़्बा है जिसके दम पर इंसानियत जिंदा है। शायरी और कविताएं इंसानियत और भाईचारे में ऊर्जा भरने का काम करती हैं। पेश है इंसानियत और भाईचारे पर शायरों के अल्फ़ाज़- 
                                                                 
                            

प्यार की चाँदनी में खिलते हैं
दश्त-ए-इंसानियत के फूल हैं हम
- मसूद मैकश मुरादाबादी

....हर हाल में हमदर्द हो 

आदमी का आदमी हर हाल में हमदर्द हो 
इक तवज्जोह चाहिए इंसाँ को इंसाँ की तरफ़ 
- हफ़ीज़ जौनपुरी

मज़हबी बहस मैंने की ही नहीं 
फ़ालतू अक़्ल मुझमें थी ही नहीं 
- अकबर इलाहाबादी

क्या-क्या ग़ुबार उठाए नज़र के फ़साद ने
इंसानियत की लौ कभी मद्धम न हो सकी
- अज्ञात
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....हर हाल में हमदर्द हो 

7 वर्ष पहले

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