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पढ़िए 'हिंदी' पर इन बड़े कवियों की काव्यात्मक टिप्पणियां..... 

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                            कलम अपनी साध,
                                                                 
                            
और मन की बात बिल्कुल ठीक कह एकाध ।
यह कि तेरी-भर न हो तो कह,
और बहते बने सादे ढंग से तो बह 
जिस तरह हम बोलते हैं, उस तरह तू लिख,
और इसके बाद भी हमसे बड़ा तू दिख।

~भवानी प्रसाद मिश्र

मेरा अनुरोध है- 
भरे चौराहे पर करबद्ध अनुरोध- 
कि राज नहीं- भाषा
भाषा- भाषा- सिर्फ़ भाषा रहने दो
मेरी भाषा को ।

इसमें भरा है
पास-पड़ोस और दूर-दराज़ की
इतनी आवाजों का बूँद-बूँद अर्क
कि मैं जब भी इसे बोलता हूँ
तो कहीं गहरे
अरबी तुर्की बांग्ला तेलुगु
यहाँ तक कि एक पत्ती के
हिलने की आवाज़ भी
सब बोलता हूँ ज़रा-ज़रा
जब बोलता हूँ हिंदी

~ केदारनाथ सिंह 
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4 वर्ष पहले

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