ज़िंदगी में जैसी स्थितियां आयीं उन्हें शायरों ने अपने अल्फ़ाज़ में ढाल दिया। शायरों के दिल बेहद कोमल होते हैं इसलिए वे हालात को बहुत गहराई से महसूस कर पाते हैं। उन्होंने जितना महसूस किया उतनी ही साफ़गोई से उसे कह भी दिया। पेश हैं शायरों के 'ज़हनी हालातों' पर लिखे शेर
मिरे हालात को बस यूँ समझ लो
परिंदे पर शजर रक्खा हुआ है
- शुजा ख़ावर
अगर बदल न दिया आदमी ने दुनिया को
तो जान लो कि यहाँ आदमी की ख़ैर नहीं
- फ़िराक़ गोरखपुरी
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