गीत चतुर्वेदी आज के दौर के प्रसिद्ध कवियों में से एक हैं और युवाओं में ख़ास तौर पर लोकप्रिय हैं। पढ़ें उनके काव्य संग्रह आलाप में गिरह से चुनिंदा पंक्तियां
मैं बोलते समय अपने हाथ भी हिलाता हूँ
खट-खट जमीन पर ठोंकता हूँ अपने जूते
चुटकी बजाता हूँ, ताली पीटता हूँ, एक सीटी भी मार देता हूँ
तीन शब्द में होना था काम
तीन लाख शब्द ज़ाया हो गए
क्या मुझे ज़ोर से चिल्लाना चाहिए?
बड़े-से घंटे पर कोई मारता है हथौड़ा
अंतरिक्ष में टूटता है कोई पुच्छल तारा
गलियारे से चलने की आवाज़ आती है
कौन है जो गुज़रा है अभी-अभी
हड्डियाँ पहन
उड़ न जाए
सो पत्थरों से ढाँपकर रखा यह तन
ग़फ़लत में हो गए किसी पुण्य का
असर हो जाए कभी
इंतज़ार में हूँ
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टूटता है कोई
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