फ़साना का मतलब है - वह व्यक्ति या कहानी जो कल्पना पर आधारित हो। कई बार लोग हमारी ज़िंदगी से यूं जाते हैं कि जैसे वह एक फ़साना ही हों। इस पर शायरों ने ख़ूब लिखा है। पढ़ें शायरों के अल्फ़ाज़
कुछ इस तरह से वो शामिल हुआ कहानी में
कि इस के बाद जो किरदार था फ़साना हुआ
- सलीम कौसर
अब तो रुस्वाइयाँ यक़ीनी हैं
उन के लब पर मिरा फ़साना है
- क़ैसर निज़ामी
फ़साना-दर-फ़साना फिर रही है ज़िंदगी जब से
किसी ने लिख दिया है ताक़-ए-निस्याँ पर पता अपना
- अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
'क़मर' अपने दाग़-ए-दिल की वो कहानी मैंने छेड़ी
कि सुना किए सितारे मेरा रात भर फ़साना
- क़मर जलालवी
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