मध्य प्रदेश के रीवा की अवनि चतुर्वेदी ने मिग लड़ाकू विमान को उड़ा कर बेटियों के जज्बे को सबके सामने रख दिया है। सच ही कहा गया है...बेटियां हैं तो इस संसार में बहार है। बेटियां है तो अंधेरे में भी चमक है। बेटियां है तो हर वक्त हर किसी को सहारा है। बेटियां मान हैं, सम्मान हैं। जीवन के गुलशन की महकती फिजा हैं बिटिया...काव्य चर्चा में हम इस बार बेटियों पर केंद्रित ये मशहूर 18 शेर पेश कर रहे हैं।
ये चिड़िया भी मेरी बेटी से कितनी मिलती जुलती है,
कहीं भी शाख़-ए-गुल देखे तो झूला डाल देती है !
मुनव्वर राना
ख़ैरियत गुज़री कि अँगूर के बेटा न हुआ...
उस की बेटी ने उठा रक्खी है दुनिया सर पर
ख़ैरियत गुज़री कि अँगूर के बेटा न हुआ
आगाह देहलवी
तो फ़िर जाकर कहीं माँ-बाप को कुछ चैन पड़ता है
कि जब ससुराल से घर आ के बेटी मुस्कुराती है
मुनव्वर राना
बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं...
घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं
बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं
मुनव्वर राना
ओस की बूँद होती है बेटियाँ
स्पर्श खुरदुरा हो तो रोती है बेटियाँ
रोशन करेगा बेटा तो बस एक ही कुल को
दो दो कुलों की लाज होती हैं बेटियाँ
कोई नहीं एक दूसरे से कम
हीरा अगर है बेटा
सच्चा मोती है बेटियाँ
उड़ गईं आँगन की चिड़िया घर अकेला हो गया...
ऐसा लगता है कि जैसे ख़त्म मेला हो गया
उड़ गईं आँगन की चिड़िया घर अकेला हो गया
घरों में यूँ सयानी लड़कियाँ बेचैन रहती है
कि जैसे साहिलों पर कश्तियाँ बेचैन रहती हैं
कब नींद का मौसम मेरी आँखों को मिलेगा...
किस दिन कोई रिश्ता मेरी बहनों को मिलेगा
कब नींद का मौसम मेरी आँखों को मिलेगा
मेरी गुड़िया—सी बहन को ख़ुद्कुशी करनी पड़ी
क्या ख़बर थी दोस्त मेरा इस क़दर गिर जायेगा
अजनबी हाथ में वह अपनी कलाई देते...
किसी बच्चे की तरह फूट के रोई थी बहुत
अजनबी हाथ में वह अपनी कलाई देते
जब यह सुना कि हार के लौटा हूँ जंग से
राखी ज़मीं पे फेंक के बहनें चली गईं
क्या करूँ मैं कोई रिश्ता ही नहीं आता है...
चाहता हूँ कि तेरे हाथ भी पीले हो जायें
क्या करूँ मैं कोई रिश्ता ही नहीं आता है
हर ख़ुशी ब्याज़ पे लाया हुआ धन लगती है
और उदादी मुझे मुझे मुँह बोली बहन लगती है
घर की दहलीज़ पे बैठी रहीं मेरी बहनें...
धूप रिश्तों की निकल आयेगी ये आस लिए
घर की दहलीज़ पे बैठी रहीं मेरी बहनें
इस लिए बैठी हैं दहलीज़ पे मेरी बहनें
फल नहीं चाहते ताउम्र शजर में रहना
नाउम्मीदी ने भरे घर में अँधेरा कर दिया
भाई ख़ाली हाथ लौटे और बहनें बुझ गईं
-मुनव्वर राना
साभार-कविता कोश
आगे पढ़ें
ख़ैरियत गुज़री कि अँगूर के बेटा न हुआ...
कमेंट
कमेंट X