दाग़ देहलवी उर्दू के बड़े और मक़बूल नामों में से एक हैं, उनकी लिखी शायरी अपने आप में एक अलग पहचान रखती हैं। पेश हैं उनकी ग़ज़लों में से कुछ चुनिंदा शेर
आप पछताएँ नहीं जौर से तौबा न करें
आप के सर की क़सम 'दाग़' का हाल अच्छा है
आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता
अब तो बीमार-ए-मोहब्बत तेरे
क़ाबिल-ए-ग़ौर हुए जाते हैं
अभी आई भी नहीं कूचा-ए-दिलबर से सदा
खिल गई आज मेरे दिल की कली आप ही आप
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अब तो बीमार-ए-मोहब्बत तेरे
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