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'बच्चों' के लिए कहे शायरों के अल्फ़ाज़

children shayari collection
                
                                                         
                            

बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी
आज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा
- नज़ीर क़ैसर


कल यही बच्चे समुंदर को मुक़ाबिल पाएंगे
आज तैराते हैं जो काग़ज़ की नन्ही कश्तियां
- हसन अकबर कमाल

बच्चे खुली फ़ज़ा में कहां तक निकल गए
हम लोग अब भी क़ैद इसी बाम-ओ-दर में हैं
- असग़र मेहदी होश


भूक चेहरों पे लिए चांद से प्यारे बच्चे
बेचते फिरते हैं गलियों में ग़ुबारे बच्चे
- बेदिल हैदरी

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5 वर्ष पहले

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