बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी
आज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा
- नज़ीर क़ैसर
कल यही बच्चे समुंदर को मुक़ाबिल पाएंगे
आज तैराते हैं जो काग़ज़ की नन्ही कश्तियां
- हसन अकबर कमाल
बच्चे खुली फ़ज़ा में कहां तक निकल गए
हम लोग अब भी क़ैद इसी बाम-ओ-दर में हैं
- असग़र मेहदी होश
भूक चेहरों पे लिए चांद से प्यारे बच्चे
बेचते फिरते हैं गलियों में ग़ुबारे बच्चे
- बेदिल हैदरी
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