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ब्रज भाषा विशेष: रवीन्द्र जैन की सुरीली आवाज़ में यश गान ‘चारों धाम से निराला ब्रज धाम’

Brij bhasha special ravindra jain song charon dhaam se nirala brij dham
                
                                                         
                            

ब्रज यानी वो क्षेत्र जिसके लिए स्वयं कृष्ण ने कहा था कि, “‘ऊधौ मोहिं ब्रज बिसरत नाहीं’ अर्थात ऊधो मुझसे ब्रज भुलाया नहीं जाता।” कृष्ण की इस बात को आधार बनाकर ब्रज को लोग अक्सर अपने क्षेत्र की बढ़ाई करते हुए कहते हैं कि, “ऐसे क्षेत्र की कितनी महत्ता होगी जिसे स्वयं ईश्वर भी नहीं भुला सकते”।

ब्रज की इसी महत्ता पर वहां का यशगान करते हुए प्रसिद्ध संगीतकार व गायक रवीन्द्र जैन ने यह गीत गाया है।

ब्रज चौरासी कोस की परकम्मा एक देत
तो लख 84 चौरासी जोनि के संकट हरि हर लेत
जय जय ब्रज भूमि

चारों धामों से निराला ब्रज धाम
कि दर्सन कर लेयो जी
दर्सन कर लेयो सुमिरन कर लेयो
वंदन कर लेयो जी
लैके राधा जी बिहारी जी कौ नाम
दर्सन कर लेयो जी


(ब्रज चौरासी कोस की एक परिक्रमा देने से 84 लाख योनियों के संकट हरि दूर कर देते हैं। चार धाम की यात्रा यूं तो बहुत ही महत्वपूर्ण है और उसका महत्व भी है लेकिन यहां कहा गया है कि ब्रज धाम चार धाम से भी निराला है इसलिए इसका दर्शन और सुमिरन करना चाहिए, राधा और बिहारी जी का नाम लेकर जो कि दोनों ही ब्रज में पूज्यनीय हैं उनका नाम लेकर ब्रज का दर्शन करना चाहिए।)
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7 वर्ष पहले

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