असर लखनऊ की पैदाइश 12 जुलाई 1885 को लखनऊ के मुहल्ला कटरा अबुतुराब में हुई। उनका वास्तविक नाम मिर्ज़ा जाफ़र अली ख़ाँ था, 'असर' तख़ल्लुस है। 'असर' पेशे से डिप्टी कलेक्ट्रर थे लेकिन साथ ही साथ कई और महत्वपूर्ण पदों पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी। भारत सरकार ने उन्हें "पद्म भूषण" सम्मान से मम्मानित किया। शेरों-शायरी की कड़ी में आज पाठकों के लिए पेश है 'असर' लखनवी के चुनिंदा शेर-
पलकें घनेरी गोपियों की टोह लिए हुए
राधा के झाँकने का झरोका ग़ज़ब ग़ज़ब
भूलने वाले को शायद याद वादा आ गया
मुझ को देखा मुस्कुराया ख़ुद-ब-ख़ुद शरमा गया
हम कैद से रिहा जो हुए भी तो क्या हुए
जब गोश-ए-चमन में नसीब आशियां न हो
चुपके से नाम ले के तुम्हारा कभी कभी
दिल डूबने लगा तो उभारा कभी कभी
दिल को लुभाएं तो क्या करें
तेरी अदाएं दिल को लुभाएं तो क्या करें
आंखें न मानें, देखे ही जायें तो क्या करें ?
इक बात भला पूछें किस तरह मनाओगे
जैसे कोई रूठा है और तुम को मनाना है
तानों का उसके जब न कोई बन पड़े जवाब
मिर्जा 'असर' जो सर न झुकायें तो क्या करें ?
न तुम बदले , न दिल बदला, न रंगे-आस्मां बदला
न जानें क्यों नजर आता है, फिर सारा जहां बदला
किसी ने हाल जब पूछा तो यह हालत हुई अपनी
नज़र भी झुक गई अपनी जबां भी रुक गई अपनी
मुहब्बत में ऐसा भी इक दौर गुजरा
नज़र उसने फेरी खफ़ा हो गये हम
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याद वादा आ गया
8 वर्ष पहले
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