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आज का शब्द तरुवर और गोपाल सिंह नेपाली का बेहतरीन गीत: पिया मिलन की घड़ियां रे 

आज का शब्द तरुवर और गोपाल सिंह नेपाली का बेहतरीन गीत: पिया मिलन की घड़ियां रे
                
                                                         
                            अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- तरुवर, जिसका अर्थ है- उत्तम या बड़ा वृक्ष, पेड़। प्रस्तुत है गोपाल सिंह नेपाली का बेहतरीन गीत: पिया मिलन की घड़ियां रे...
                                                                 
                            

बाबुल तुम बगिया के #तरुवर, हम #तरुवर की चिड़ियां रे 
दाना चुगते उड़ जाएं हम, पिया मिलन की घड़ियां रे 
उड़ जाएं तो लौट न आयें, ज्यों मोती की लड़ियां रे 
बाबुल तुम बगिया के तरुवर …

आँखों से आँसू निकले तो पीछे तके नहीं मुड़ के
घर की कन्या बन का पंछी, फिरें न डाली से उड़ के 
बाजी हारी हुई त्रिया की 
जनम -जनम सौगात पिया की 
बाबुल तुम गूंगे नैना, हम आँसू की फुलझड़ियां रे 
उड़ जाएं तो लौट न आयें ज्यों मोती की लड़ियां रे 
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5 वर्ष पहले

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