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आज का शब्द - ज्वार और शिवमंगल सिंह सुमन की कविता - तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

Aaj ka Shabd Jwar
                
                                                         
                            अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है - ज्वार, जिसका अर्थ है 1. ख़रीफ़ की फ़सल में होने वाला एक मोटा अनाज; एक प्रसिद्ध पौधा और उसके दाने या बीज, जिनकी गिनती अनाज में होती है 2. चंद्रमा के आकर्षण के कारण समुद्र के जल का ऊपर उठना 3. 'भाटा' का विलोम। प्रस्तुत है शिवमंगल सिंह सुमन की कविता - तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार
                                                                 
                            

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार
आज सिन्धु ने विष उगला है
लहरों का यौवन मचला है
आज ह्रदय में और सिन्धु में
साथ उठा है ज्वार
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

लहरों के स्वर में कुछ बोलो
इस अंधड में साहस तोलो
कभी-कभी मिलता जीवन में
तूफानों का प्यार
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार
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5 वर्ष पहले

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