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आज का शब्द- इंदुमती और नागार्जुन की सुप्रसिद्ध कविता: कालिदास ! सच-सच बतलाना ! 

आज का शब्द- इंदुमती और नागार्जुन की सुप्रसिद्ध कविता: कालिदास सच-सच बतलाना
                
                                                         
                            अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- इंदुमती। पौराणिक पात्र राजा अज की पत्नी का नाम भी इंदुमती था और इस शब्द का दूसरा अर्थ है- पूर्णिमा। प्रस्तुत है नागार्जुन की कविता- कालिदास !
                                                                 
                            

कालिदास ! सच-सच बतलाना 
इन्दुमती के मृत्युशोक से 
अज रोया या तुम रोये थे? 
कालिदास ! सच-सच बतलाना ! 

शिवजी की तीसरी आँख से 
निकली हुई महाज्वाला में 
घृत-मिश्रित सूखी समिधा-सम 
कामदेव जब भस्म हो गया 
रति का क्रंदन सुन आँसू से 
तुमने ही तो दृग धोये थे 
कालिदास ! सच-सच बतलाना 
रति रोयी या तुम रोये थे? 
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6 वर्ष पहले

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