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शिवमंगल सिंह सुमन की श्रेष्ठ 5 कविताएं

shivmangal singh suman selected 5 hindi poetry
                
                                                         
                            

हिंदी साहित्य में शिवमंगल सिंह सुमन एक प्रसिद्ध नाम है। हिंदी साहित्य में प्रगतिशील लेखन के अग्रणी कवि सुमन का जन्म 5 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हुआ था। सुमन का निधन 27 नवंबर 2002 को हुआ। स्वतंत्रता, देशभक्ति और स्वाभिमान पर सुमन के बोल काफी ओजस्वी रहे हैं।  

वरदान मांगूंगा नहीं.... 

यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिटूंगा पर दया की भीख मैं लूंगा नहीं
वरदान मांगूंगा नहीं।

स्मृति सुखद प्रहरों के लिए
अपने खंडहरों के लिए
यह जान लो मैं विश्व की संपत्ति चाहूंगा नहीं
वरदान मांगूंगा नहीं।

क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संधर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही
वरदान मांगूंगा नहीं।

लघुता न अब मेरी छुओ
तुम हो महान बने रहो
अपने हृदय की वेदना मैं व्यर्थ त्यागूंगा नहीं
वरदान मांगूंगा नहीं।

चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्तव्य पथ से किंतु भागूंगा नहीं
वरदान मांगूंगा नहीं।

 

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मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार...

5 वर्ष पहले

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