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शिवदीन राम जोशी: मन प्रेम करो शुभ टेम ही टेम है

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अनुराग में प्रेम है त्याग में प्रेम है,
भाग्य में प्रेम है ये ही तो नेम है।

ग्यान ही प्रेम है ध्यान ही प्रेम है,
राम ही प्रेम है प्रेम ही प्रेम है।

शिवदीन है प्रेम कहो मन में,
 जन में तन में कुशलानंद क्षेम है।

परवाह करो न डरो न मरो,
मन प्रेम करो शुभ टेम ही टेम है।

4 वर्ष पहले

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