मैं अपने भारतवर्ष का सम्मान करती हूं
मैं देश की बेटी हूं और देश पर मरती हूं ,
जो झेल गए सीमा पर दुश्मन की खूनी गोली
करके सलाम सरहद को फिर आंख ना अपनी खोली,
जिसने मेहंदी को त्यागा और वर्दी को अपनाया
जिसने मां की ममता को इस देश के लिए भुलाया
मैं उस वीर सिपाही को प्रणाम करती हूं
मैं देश की बेटी हूं ---
जब निकला था वो घर से, दिल मां का बैठ गया था,
फिर भी बन करके पत्थर, हंस कर विदा किया था
मैं उस कर्मठ नारी का सम्मान करती हूं।
मैं भारत की ---
हल्दी चंदन और बंधन, मेहंदी से हाथ सजे थे ,
सपने थे सभी अधूरे, कुछ पल संग में गुजरे थे
आ गया बुलावा जल्दी, सीमा पर छिड़ी लड़ाई
जब भेज रही थी रण में ,तब बिल्कुल ना घबराई,
में भारत की उस देवी का ,गुणगान करती हूं,
मैं भारत की बेटी हूं ---
जो बांट दे लोगों को ,रंगो के भेद में रंगकर
जो काशी और बावरी को दंगों में जकड़ ले कसकर
उस राष्ट्रवाद की शान को, धिक्कार करती हूं,
मैं भारत की ---
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