आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Hindi Poetry: कुँवर नारायण की 3 चुनिंदा कविताएं

कविता
                
                                                         
                            1-
                                                                 
                            

रात मीठी चांदनी है,
मौन की चादर तनी है,

एक चेहरा ? या कटोरा सोम मेरे हाथ में
दो नयन ? या नखतवाले व्योम मेरे हाथ में?

प्रकृति कोई कामिनी है?
या चमकती नागिनी है?

रूप- सागर कब किसी की चाह में मैले हुए?
ये सुवासित केश मेरी बांह पर फैले हुए:

ज्योति में छाया बनी है,
देह से छाया घनी है,

वासना के ज्वार उठ-उठ चंद्रमा तक खिंच रहे,
ओंठ पाकर ओंठ मदिरा सागरों में सिंच रहे;

सृष्टि तुमसे मांगनी है
क्योंकि यह जीवन ऋणी है,

वह मचलती-सी नजर उन्माद से नहला रही,
वह लिपटती बांह नस-नस आग से सहला रही,

प्यार से छाया सनी है,
गर्भ से छाया धनी है,

दामिनी की कसमसाहट से जलद जैसे चिटकता...
रौंदता हर अंग प्रतिपल फूटकर आवेग बहता ।

एक मुझमें रागिनी है
जो कि तुमसे जागनी है।

2-  आगे पढ़ें

धब्बे और तस्वीर

एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर