मैं बेटी महाकाल की
हर हर महादेव!
मैं बेटी हूँ महाकाल की,
झुकना मुझे नहीं आता,
आँधियाँ चाहे लाख चलें,
रुकना मुझे नहीं आता।
न डर मुझे तूफानों का,
न चिंता जग के तानों की,
जब साथ खड़े महाकाल मेरे,
क्या शक्ति इन बाधाओं की।
उज्जैन की पावन धरती पर,
शिव का आशीष पाया है,
हर संकट में महाकाल ने,
मुझको गले लगाया है।
संघर्षों से मैं निखरी हूँ,
अग्नि में तपकर कुंदन हूँ,
महाकाल की बेटी कहलाऊँ,
यही मेरा सबसे बड़ा गौरव है।
नाम मेरा ज्योति है,
शिव की ज्योति कहलाती हूँ,
मैं महाकाल की बेटी हूँ,
यही पहचान बताती हूँ।
जब मन थककर बैठ जाता है,
जब साथ कोई नहीं देता,
महाकाल का स्मरण मात्र ही,
मुझमें नया विश्वास जगाता है।
न डरती हूँ अंधियारों से,
न हालातों से घबराती हूँ,
महाकाल का हाथ है सिर पर,
हर मुश्किल से लड़ जाती हूँ।
मैं बेटी हूँ उस महाकाल की,
जो सबका भाग्य विधाता है,
जिसकी कृपा की एक झलक से,
जीवन भी मुस्कुराता है।
मैं शक्ति हूँ, मैं भक्ति हूँ,
मैं शिव का एक वरदान हूँ,
महाकाल की बेटी होकर,
साहस की मैं पहचान हूँ।
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