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गोपालदास नीरज: चुनिंदा मुक्तक, गीत और कविताएं

gopaldas neeraj selected muktak geet kavitayein
                
                                                         
                            आह वह रूप
                                                                 
                            

आह वह रूप, वह यौवन, वह निरी शोख़ छटा,
जिसने देखी न, तेरे दर से वो फिर दूर हटा,
गोरे मुखड़े पे वो बिखरी हुई बालों की लटें
चाँद को जैसे लिए गोद हो सावन की घटा  आगे पढ़ें

जहाँ मैं हूँ

4 वर्ष पहले

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