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Surjeet Patar: प्रसिद्ध पंजाबी कवि की अनूदित कविता 'पुल'

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मैं जिन लोगों के लिए पुल बन गया था
वे जब मेरे से गुज़रकर जा रहे थे
मैंने सुना मेरे बारे में कह रहे थे :

वह कहाँ छूट गया है चुप-सा आदमी
शायद पीछे लौट गया है

हमें पहले ही ख़बर थी कि उसमें दम नहीं है।

2 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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