हवाई सेतु
महज़ काग़ज़ों पर ही
बना लिए गए जो
या फिर, बेशक,
जिन्हें नसीब हुई जमीन,
ढह ही गए वे सभी सेतु
समय बीतते,
और बहुधा, समय से कहीं पहले।
इन अभियांत्रिकी प्रतिरूपों को
बनाते-बनाते, मग़र,
बाँध लिए गए जो हवाई सेतु
या फिर जो
किन्हीं निहित स्वार्थ में,
खुद-ब-खुद बन कर निकले
आसान सी पगडंडियाँ-
इस जेब से उस जेब तक,
वे सब व्यावहारिक संपदा के
अटूट स्तम्भ बने,
मजबूती से खड़े रहे-
सालों-साल चलते, क्योंकि,
महज ईंट और गारे से नहीं-
बनाये गए थे वे सभी,
सोने-चांदी की ईंटों से!
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