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अटल बिहारी वाजपेयी की कविता- पड़ोसी से

इंडो पाक बॉर्डर
                
                                                         
                            एक नहीं दो नहीं करो बीसों समझौते,
                                                                 
                            
पर स्वतन्त्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा।

अगणित बलिदानो से अर्जित यह स्वतन्त्रता,
अश्रु स्वेद शोणित से सिंचित यह स्वतन्त्रता।
त्याग तेज तपबल से रक्षित यह स्वतन्त्रता,
दु:खी मनुजता के हित अर्पित यह स्वतन्त्रता।
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3 वर्ष पहले

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