अगर बनूँ मैं
गुलाब, तो तेरे
आंगन में ही
खिलना चाहूँ,
हरपल रहकर साथ
तुम्हारे,
देख तुम्हें मुस्काऊं
कांटों से घिरकर भी
छोड़ कहीं न जाऊं,
दुःख में रहूं
मैं साथ तुम्हारे,
सुख में तेरे संग मुस्काऊं,
मुरझा जाए जब
तरुणाई, कोई खुशबू
मैं लुटा न पाऊं
झड़ जाऊं जब
शाखों से अपनी ,
तब रख लेना
तुम मुझको
अपनी कोई चिठ्ठी में,
या बिखेर देना
मुझको अपनी बगिया की
मिट्टी में....
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