अगर बनूँ मैं
गुलाब, तो तेरे
आंगन में ही
खिलना चाहूँ,
हरपल रहकर साथ
तुम्हारे,
देख तुम्हें मुस्काऊं
कांटों से घिरकर भी
छोड़ कहीं न जाऊं,
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