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आज का शब्द: निस्पृह और सुमित्रानंदन पंत की कविता- ऐ मिट्टी के ढेले अनजान !

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- निस्पृह, जिसका अर्थ है- जिसे किसी प्रका का लोभ या कामना न हो, निर्लोभ। प्रस्तुत है सुमित्रानंदन पंत की कविता- ऐ मिट्टी के ढेले अनजान!
                                                                 
                            

ऐ मिट्टी के ढेले अनजान!
तू जड़ अथवा चेतना-प्राण?
क्या जड़ता-चेतनता समान,
निर्गुण, निसंग, निस्पृह, वितान?

कितने तृण, पौधे, मुकुल, सुमन,
संसृति के रूप-रंग मोहन,
ढीले कर तेरे जड़ बन्धन
आए औ’ गए! (यही क्या मन?)

अब हुआ स्वप्न मधु का जीवन,
विस्मृत-स्मृति के विमुक्त बन्धन!
खुल गया शून्यमय अवगुंठन
अज्ञेय सत्य तू जड़-चेतन!

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8 महीने पहले

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