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गांधी जयंती-युग-युग तक युग का नमस्कार!...सोहनलाल द्विवेदी

मोहनदास करमचंद गांधी
                
                                                         
                            बापू की जयंती को हिंदी की यह कविता और जीवंत कर देगी... 
                                                                 
                            

चल पड़े जिधर दो डग मग में 
चल पड़े कोटि पग उसी ओर,
पड़ गई जिधर भी एक दृष्टि 
गड़ गये कोटि दृग उसी ओर, 
जिसके शिर पर निज धरा हाथ
उसके शिर-रक्षक कोटि हाथ,
जिस पर निज मस्तक झुका दिया
झुक गये उसी पर कोटि माथ; आगे पढ़ें

खींचते काल पर अमिट रेख...

7 वर्ष पहले

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