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रक्षा बंधन विशेष, मुनव्वर राना: भाई-बहन का रिश्ता क्या है...

Munawwar Rana
                
                                                         
                            भाई-बहन
                                                                 
                            

हमारे और उसके बीच इक धागे का रिश्ता है
हमें लेकिन हमेशा वो सगा भाई समझती है
 
उलझता रहता हूँ मैं यूँ तुम्हारी यादों से
कि जैसे बच्चे के हाथों में उन आ जाए

झुक के मिलते हैं बुज़ुर्गों से

झुक के मिलते हैं बुज़ुर्गों से हमारे बच्चे
फूल पर बाग़ की मिट्टी का असर आता है
 
हर एक रिश्ते से अपने आपको आज़ाद कर लेंगे
ये बच्चे एक दिन कालोनियाँ आबाद कर लेंगे
 
नहीं सुनता है मेरी तो मेरे बच्चों की ही सुन ले
ये वो मौसम है जब चिड़िया भी अपना घर बनाती है
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झुक के मिलते हैं बुज़ुर्गों से

8 वर्ष पहले

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