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ओम प्रकाश आदित्य: दाल-रोटी दी तो दाल-रोटी खा के सो गया मैं...

Om Prakash Aditya hasya kavita
                
                                                         
                            दाल-रोटी दी तो दाल-रोटी खा के सो गया मैं
                                                                 
                            
आंसू दिये तूने आंसू पिए जा रहा हूं मैं

दुख दिए तूने मैंने कभी न शिकायत की
जब सुख दिए सुख लिए जा रहा हूं मैं

पतित हूं मैं तो तू भी तो पतित पावन है
जो तू करा ता है वही किए जा रहा हूं मैं

मृत्यु का बुलावा जब भेजेगा तो आ जाउंगा
तूने कहा जिए जा तो जिए जा रहा हूं मैं

- ओम प्रकाश आदित्य

साभार- कविता कोश 
8 वर्ष पहले

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