भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्'आ
मौत ने तो धर दबोचा एक चीते की तरह
ज़िंदगी ने जब छुआ तो फ़ासला रखकर छुआ
गिड़गिड़ाने का यहां कोई असर होता नहीं
पेट भरकर गालियां दो, आह भरकर बद्दुआ
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क्या वजह है प्यास ज़्यादा तेज़ लगती है यहाँ
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