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सफलता और विफलता की परिभाषाएँ भिन्न हैं मेरी: जयप्रकाश नारायण

सफलता और विफलता की परिभाषाएँ भिन्न हैं मेरी: जयप्रकाश नारायण
                
                                                         
                            जीवन विफलताओं से भरा है,
                                                                 
                            
सफलताएँ जब कभी आईं निकट,
दूर ठेला है उन्हें निज मार्ग से ।

तो क्या वह मूर्खता थी ?
नहीं ।

सफलता और विफलता की
परिभाषाएँ भिन्न हैं मेरी !

इतिहास से पूछो कि वर्षों पूर्व
बन नहीं सकता प्रधानमन्त्री क्या ?
किन्तु मुझ क्रान्ति-शोधक के लिए
कुछ अन्य ही पथ मान्य थे, उद्दिष्ट थे,
पथ त्याग के, सेवा के, निर्माण के,
पथ-संघर्ष के, सम्पूर्ण-क्रान्ति के ।

जग जिन्हें कहता विफलता
थीं शोध की वे मंज़िलें ।
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6 वर्ष पहले

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