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कुंवर नारायण: ...लौटता है कोलम्बस का जहाज़ खोज कर एक नई दुनिया

kunwar narayan on columbus ship
                
                                                         
                            बार-बार लौटता है
                                                                 
                            
कोलम्बस का जहाज
खोज कर एक नई दुनिया,
नई-नई माल-मंडियां,
हवा में झूमते मस्तूल
लहराती झंडियां।

बाज़ारों में दूर ही से
कुछ चमकता तो है−
हो सकता है सोना
हो सकती है पालिश
हो सकता है हीरा
हो सकता है कांच...
ज़रूरी है पक्की जांच।

ज़रूरी है सावधानी 
पृथ्वी पर लौटा है अभी-अभी
अंतरिक्ष यान
खोज कर एक ऐसी दुनिया
जिसमें न जीवन है−न हवा−न पानी

(कुंवर नारायण की ये कविता, कविता कोश से साभार ली गई है)
9 वर्ष पहले

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