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अटल बिहारी वाजपेयी की कविता- हिरोशिमा की पीड़ा

atal bihari vajpayee
                
                                                         
                            किसी रात को 
                                                                 
                            
मेरी नींद चानक उचट जाती है 
आँख खुल जाती है 
मैं सोचने लगता हूँ कि 
जिन वैज्ञानिकों ने अणु अस्त्रों का 
आविष्कार किया था 
वे हिरोशिमा-नागासाकी के भीषण 
नरसंहार के समाचार सुनकर 
रात को कैसे सोए होंगे? 
क्या उन्हें एक क्षण के लिए सही 
ये अनुभूति नहीं हुई कि 
उनके हाथों जो कुछ हुआ 
अच्छा नहीं हुआ! 

यदि हुई, तो वक़्त उन्हें कटघरे में खड़ा नहीं करेगा 
किन्तु यदि नहीं हुई तो इतिहास उन्हें 
कभी माफ़ नहीं करेगा !
8 वर्ष पहले

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