है क़सम तुझको बता दे कि वो क्या थी तेरी : ज़िया ज़मीर

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                            वो जो बेसाख्ता हंसने की अदा थी तेरी,
                                                                     
                            
तुझको मालूम नहीं वो ही दवा थी तेरी।

हिज्र रातों में उसे ओढ़ के सो जाता था,
पास मेरे जो उदासी की रिदा थी तेरी।

तेरे एक दोस्त ने पूछा था ये रो कर मुझसे,
है क़सम तुझको बता दे कि वो क्या थी तेरी?

बद्दुआ अपने लिए ख़ूब करी थी मैंने,
हां मगर राह में हायल जो दुआ थी तेरी।

तेरी आवाज पे लौट आए थे तेरी जानिब,
पूछना कुछ भी नहीं था कि रज़ा थी तेरी।

- ज़िया ज़मीर

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... उसको सहरा नहीं कह देना समंदर कहना

3 years ago

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