ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत
दिल लगा कर हम तो पछताए बहुत
जब न तब जागह से तुम जाया किए
हम तो अपनी ओर से आए बहुत
दैर से सू-ए-हरम आया न टुक
हम मिज़ाज अपना इधर लाए बहुत
फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे
पर हमें इन में तुम्हीं भाए बहुत
गर बुका इस शोर से शब को है तो
रोवेंगे सोने को हम-साए बहुत
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