धड़कते साँस लेते रुकते चलते मैंने देखा है
कोई तो है जिसे अपने में पलते मैंने देखा है
तुम्हारे ख़ून से मेरी रगों में ख़्वाब रौशन है
तुम्हारी आदतों में ख़ुद को ढलते मैंने देखा है
न जाने कौन है जो ख़्वाब में आवाज़ देता है
ख़ुद अपने-आप को नींदों में चलते मैंने देखा है
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